Indian lady teacher
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Indian lady teacher – स्कूली छात्रों ने बसाया अपने अध्यापिका का घर

Indian lady teacher - बदलते समाज माध्यमों की और डिजिटल माध्यमों की ताकद 

Indian lady teacher – स्कूली छात्रों ने बसाया अपने अध्यापिका का घर

 

 

Indian lady teacher – बदलते समाज माध्यमों की और डिजिटल माध्यमों की ताकद 

 

 

 

बदलते समाज माध्यमों से क्रियता और निष्क्रियता पर हर वक़्त कुछ ना कुछ सवाल उठते जरूर हे, इन माध्यम का असर – बेअसर कुछ समय सीमांत

तक ही रहता हे, ऐसे में इसकी विश्वसनीयता के प्रति समाज के मूल माध्यमों के प्रस्थापितो द्वारा हमेशा सवाल उठ खड़ा होता हे। पर इन माध्यमों को

नजरअंदाज करना आज की तारीख में मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा।

इसी विषय पर जुडी एक घटना सामने आ गयी जब, केरला के मल्लपुरम में गणित विषय की शिक्षा प्रदान करने वाली एक शिक्षण संस्था की

Indian lady teacher शिक्षिका जिसे अपने जीवन के निवृत्ति समय के बाद शांतिपूर्ण जीवन बहोत आनंद उल्हास के साथ अपने परिवार के

साथ व्यतीत करने की बजाय रेल्वे प्लेटफार्म की नजदीक सडको पर भिक माँगते बिताना पड़ रहा  था। एक दिन उन्ही से शिक्षा प्राप्त कर अपनी

जिंदगी में शोहरत हासिल कर चुके उन्ही के एक छात्रा की नजर उनपर गिरी। छात्रा ने उन्हें अपना परिचय पहचान बार बार बताकर भी उन्हें याद

नहीं आ रही थी। आखिर में उस छात्रा ने उन्हें अपने घर ले जा कर अपने पास की यह पाठशाला के बरामदे में उस वक़्त की उन्ही के साथवाली यह

तस्वीर दिखाई तब जाकर उन्हें परिचय हुवा। छात्रा को गले लगा कर वो फुट फुट कर रोने लगी।

 

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काफी देर बाद उनका दुःख हलका होने के बाद उस Indian lady teacher शिक्षिका ने बताया मेरे निवृति के पश्चात मेरे खून के रिश्ते मेरे बेटो ने मुझे

घर से बाहर निकाल कर यहाँ इस प्लेटफार्म पर छोड़कर निकल गए.तब से में यहाँ पर हु. मुझे उनके रहें सेहन का कोई ठाव ठिकाना अब पता भी नहीं।

नाही मुझे ढूंढने की उन्होंने फिरसे कोशिश की. तब से अपना पेट और गुजारा करने के लिए में उस फ्लेटफॉर्म पर भिक मांगती हु। छात्रा की आँखों से

आंसू का सैलाब बाहर आया. उस छात्रा ने उन्हें बड़े मान सन्मान के साथ कपडे साड़ी पहनने के लिए दी। उसे उनका मनपसंद खाना दिया और आगे

चलकर उनके भविष्य में उनके रेहन सेहन और जिंदगी गुजारने की व्यवस्था करने के लिए सोशल नेटवर्क के जरिये जुड़े सभी स्कूली दोस्तों को अपने

अध्यापिका के बारे में बताकर इकट्ठा किया। आज उस अध्यापिका के सभी छात्रों ने मिलकर उनके रहने का और खाने का इंतजाम बहोत ही अच्छे से

कर दिया ताकि उनकी आगे की जिंदगी में उन्हें कुछ तकलीफ ना हो और होगी भी तो वो उन्हें हर वक़्त मदत करते रहेंगे यह विश्वास भी दिया।

जब अपने खुद के बच्चे जिंदगी के ऐसे वक़्त में उन्हें साथ छोड़ देते हे जब सबसे ज्यादा जरुरत होती हे. पर इन समाज माध्यमों की बदौलत

आज सभी इकट्ठा हुवे छात्रों ने यह साबित कर दिया की हम बच्चे आपको नहीं छोड़ देंगे।

यही तो शिक्षा का महत्त्व होता हे और यही गुरु शिष्य परंपरा भारतीय सभ्यता संस्कृति का मूल हे.

 

– सत्य घटना पर आधारित 

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